मेरे कान्हा मुरली वाले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे कान्हा मुरली वाले क्यों न बतिया मेरी माने,

नित गोपियों के संग तू खेले मेरा प्यार न तू पहचाने,

मेरी राधा रानी कितना मैं तुझसे प्यार करू,

तुझपे ही तो मैं अपनी जान निशार करू,

सुन मेरी राधा रानी...

हर पल हर दम तुमतो बंसी बजाते हो,

बंसी बजा के तुम तो गोपियों को रिजाते हो,

ये जब देखे मेरी अँखियाँ ताना मारे मोरी सखियाँ,

मोहे भूख प्यास न लागे ना ही कट ती मेरी रतियाँ,

मेरी राधा रानी कितना मैं तुझसे प्यार करू,

तुझपे ही तो मैं अपनी जान निशार करू,

सुन मेरी राधा रानी...

बात बात पे मुझसे तुम सवाल करती हो,

हद से जयदा क्यों तुम मेरा ख्याल करती हो,

मैं देखु तेरा सपना कब बनेगा तू मेरा अपना,

मुझे नींद चैन ना आये कैसे आउ तेरे अंगना,

मेरी राधा रानी कितना मैं तुझसे प्यार करू,

तुझपे ही तो मैं अपनी जान निशार करू,

सुन मेरी राधा रानी...

प्रेम भाव के पल पे संसार चलता हु,

अपने भोले पल से राधा तुम्हे रिजाता हु,

मैं बरसाने की छोरी तेरी हर बतियाँ है कोरी,

रजनीश तेरे गन गए दर्शन को तेरे दर आये,

मेरी राधा रानी कितना मैं तुझसे प्यार करू,

तुझपे ही तो मैं अपनी जान निशार करू,

सुन मेरी राधा रानी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।