किसे क्या मिला मुकदर की बात है

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॥ पावन पाठ ॥

किसे क्या मिला मुकदर की बात है ख़ुशी है येही तू तो मेरे साथ है,

किस्मत में नहीं था जो इक तेरे मिलने से वो भी है मिला हमको,

किरपा है तेरी इनायत है तेरी बहकने मुझे दिया तूने न कभी,

उजाले दिए हुई जब भी रात है ख़ुशी है येही तू तो मेरे साथ है,

रेहमत का उजाला है अंग संग होने का तेरे एहसास निराला है,

तू साहिल मेरा सफीना भी तू मेरा,

मुझे दर है क्या अगर साथ है तेरा,

तू साथी है तो यहाँ सारा साथ है,

ख़ुशी है यही तू तो मेरे साथ है,

कश्ती भी किनारा भी इस भव सागर में तू खेवन हारा भी,

किसे क्या मिला मुकदर की बात है ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।