शिव शंकर भोला नाचे कैलाश के माहि

संजय मित्तल
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव शंकर भोला नाचे कैलाश के माहि,

डिम डिम डमरू गूंज रहा संसार में भाई,

शिव शंकर भोला नाचे कैलाश के माहि,

सावन का महीना आया शिव शंकर भांग चढ़ाया,

खा कर के आक धतूरा भोला मस्ती में आया,

छम छम गुंगरू बाजे रुत नाचन की आई,

शिव शंकर भोला नाचे कैलाश के माहि,

संदेसा भू पर आया भगतो का मन हरषाया,

शिव शंकर तप से जागे मिलने का अवसर आया,

गंगा जल लेकर दोड़ो रुत कावड़ की आई,

शिव शंकर भोला नाचे कैलाश के माहि,

कावड़ियाँ बढ़ता जावे बम बम की अलख जगावे,

शिव भगता की भगता ने सारी दुनिया शीश निभावे,

नंदू शिव भोले नाथ का दर्शन है सुख दाई,

शिव शंकर भोला नाचे कैलाश के माहि,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।