जैसे सूरज निकलता है पुरब दिशा से,

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॥ पावन पाठ ॥

जैसे सूरज निकलता है पुरब दिशा से,

वैसे साई मेरे साथ साथ चलता है,

जैसे चन्दा चमकता है तारों के साथ,

वैसे साई मेरे साथ साथ चलता है,

इन हवाओ में साईं की खुशबू है,

इन नजरो में साईं का जादू है,

जैसे फूलो की बगियाँ महक ती है रोज,

वैसे साईं मेरे साथ साथ खिलता है,

जैसे चन्दा चमकता है तारों के साथ,

वैसे साई मेरे साथ साथ चलता है,

हर कदम मुझको थमे है राहो में डूबती नही मैं आहो में,

जैसे पतवार होती है नैया की साथी,

वैसे साईं मेरे साथ साथ धुलता है,

जैसे चन्दा चमकता है तारों के साथ,

वैसे साई मेरे साथ साथ चलता है,

साईं के नाम की मैं दीवानी हु,

क्या हुआ है जो सब से बेगानी हु,

जैसे धुप में साया रहे छाव का,

वैसे साईं मेरे साथ साथ रहता है,

जैसे चन्दा चमकता है तारों के साथ,

वैसे साई मेरे साथ साथ चलता है,

आसमा पे ज़मीन पे वो कं कं में,

वो वसा है हमारे ही तन मन में,

जैसा चलता है बादल घटाओ के साथ,

वैसे साईं मेरे साथ साथ चलता है,

जैसे चन्दा चमकता है तारों के साथ,

वैसे साई मेरे साथ साथ चलता है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।