सांवरिया ओळ्यू थारी आवे है रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सांवरिया ओळ्यू थारी आवे है रे, सांवरिया ओळ्यू थारी आवे है रे,

म्हारे नैणा म समाओ, घनश्याम,कन्हैया ओळ्यू थारी आवे है रे !!

सांवरिया होद तो चिणाय दीन्यो रे,सांवरिया होद तो चिणाय दीन्यो रे,

म्हारे होदाँ म न्हावण न-२, आओ श्याम, सांवरिया ओळ्यू थारी आवे है रे !!

सांवरिया रसोयाँ बणाय दिनी रे,सांवरिया रसोयाँ बणाय दिनी रे,

म्हारी रसोयाँ जीमण ने आओ श्याम, सांवरिया ओळ्यू थारी आवे है रे !!

सांवरिया बाग़ तो लगाय दिन्या रे, सांवरिया बाग़ तो लगाय दिन्या रे,

म्हारा बागाँ म घूमण न-२, आओ श्याम, सांवरिया ओळ्यू थारी आवे है रे !!

सांवरिया भवन चिणाय दिन्या रे, सांवरिया भवन चिणाय दिन्या रे,

म्हारे आँगणीये खेलण न, आओ श्याम, सांवरिया ओळ्यू थारी आवे है रे !!

सांवरिया महल तो चिणाय दिन्या रे, सांवरिया महल तो चिणाय दिन्या रे,

म्हारे महलां म सोवण न, आओ श्याम, सांवरिया ओळ्यू थारी आवे है रे !!

सांवरिया "लक्ष्मी" करे है विनती, सांवरिया "लक्ष्मी" करे है विनती,

म्हाने भव सूं पार लगाओ,-२, म्हारा श्याम, सांवरिया ओळ्यू थारी आवे है रे !!

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।