हे गुरुवर आप मेरे मोक्ष के आधार हो

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

हे गुरुवर आप मेरे मोक्ष के आधार हो,

आप नैया आप सागर आप ही पतवार हो,

हे गुरुवर आप मेरे मोक्ष के आधार हो

आप के भजनो में मेरे मन का दर्पण धो दियां,

आप जो मेरे हुए तो मैं को मैंने खो दिया,

ज्ञान की परिभाषा हो और सच का सच में सार हो,

हे गुरुवर आप मेरे मोक्ष के आधार हो

आप के हाथो में मुनि वर अब ये मेरा हाथ है,

आप की छाया में मैं हु तो दिन से उजली ये रात है,

क्यों मेरी इस आत्मा पे वासना का पार हो,

हे गुरुवर आप मेरे मोक्ष के आधार हो

आप के महाकवाये का हिरदये से जब भी स्पर्श हो,

मेरे अंतर मन से मेरा जब भी विचार भिमर्ष हो,

आती जाती साँस होने आप ही उस पार हो,

हे गुरुवर आप मेरे मोक्ष के आधार हो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।