माला फेरो नी राजी राजी मारा भुड़ा माजी

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॥ पावन पाठ ॥

माला फेरो ने राजी राजी मारा भुड़ा माजी ,

रोटी खावे तो मुखड़ो जी दुखे,

हलवो खावे तो घणा राजी,

मारा भूड़ा माजी..

मन्दिर जावे तो पगल्या जी दुखे,

घर घर फरवा मे घणा राजी ,

मारा भूड़ा माजी..

गीता पड़े तो आंख्या जी दुखे,

टीवी देखे तो घणा राजी,

मारा भुड़ा माजी..

माळा फेरे तो हाथ गणा दुखे,

रुपिया गीणे तो घणा राजी,

मारा भूड़ा माजी

कुलदीप मेनारिया ,कमलेश मेनारिया आलाखेड़ी॥

9799294907

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।