तेरी शान तेरे जलाल को मैंने जब से दिल में बसा लिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरी शान तेरे जलाल को

मैंने जब से दिल में बसा लिया।

मैंने सब चिराग बुझा दिए,

तेरा इक चिराग जला लिया॥

तेरी आस ही मेरी आस ही,

तेरी धुल मेरा लिबास है।

अब मुझे तू अपना बना भी ले,

मैंने तुझको अपना बना लिया॥

मुझे धुप छाव का गम नहीं,

तेरे कांटे फूलों से कम नहीं।

मुझे जान से भी अज़ीज़ है,

जिस चमन से तेरा दीया लिया॥

तेरी रहमतें बेहिसाब हैं,

किस जुबान से करूँ शुक्रिया।

कभी मुझ से कोई खता हुई

तूने फिर से मुझ को उठा लिया॥

मेरी हार तेरी ही हार है,

मेरी जीत तेरी ही जीत है।

मैंने सौंपा तुझको वो सभी,

तूने जो मुझ को दिया॥

मेरे साथ है साया श्याम का,

बस यह तस्सल्ली की बात है।

मैं तेरी नज़र से नहीं गिरा,

मुझे हर नज़र ने गिरा दिया॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।