कान्हा रे कान्हा आजा अब आजा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा रे कान्हा आजा अब आजा ll

मेरा दिल यह पुकारे आजा

अखियों की प्यास बुझा जा

मेरी लाज बचाने आजा

मुझे गले लगाने आजा

कान्हा रे कान्हा, आजा अब आजा ll

रोता है दिल, पथराई अखियाँ

बाट निहारे, बाट निहारे

मेरा यह जीवन, सुन मेरे मोहन

तेरे सहारे, तेरे सहारे

मेरी विगड़ी बनाने आजा

मेरे दुखड़े मिटाने आजा

कभी मिलने मिलाने आजा

आजा रे दीवाने आजा

कान्हा रे कान्हा आजा,,,,,,,,,,,,,,,,

सँभला हूँ मैं गिर, गिर के कन्हैया

फिर ना गिराना, फिर न गिराना

मेरी गई तो, जाएगी तेरी

हसेगा ज़माना, हसेगा ज़माना

गिरते को उठाने आजा

हारे को जिताने आजा

कभी मिलने मिलाने आजा

आजा रे दीवाने आजा

कान्हा रे कान्हा आजा,,,,,,,,,,,,,,,,

हँसते हैं लोग मुझे, कहती है दुनियां

पागल दीवाना, पागल दीवाना

सँजु जहां में, प्रेम का मतलब

किसी ने ना जाना, किसी ने ना जाना

मतलब समझाने आजा

ज़रा प्रेम निभाने आजा

कभी मिलने मिलाने आजा

आजा रे दीवाने आजा

कान्हा रे कान्हा आजा,,,,,,,,,,,,,,,,

अपलोड करता- अनिल भोपाल बाघीओ वाले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।