राम कहो या कृष्ण कहो तुम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राम कहो या कृष्ण कहो तुम ये है पावन नाम सदा,

जिन्हे भी चाहो इष्ट बना लो दोनों ही सुख धाम सदा,

त्रेता में जन्मे थे रघु वर सूर्य वंश के राज कुमार,

द्वापर में श्री कृष्ण पधारे चाँद वंश ले अवतार,

मर्यादा पुरषोतम एक है बहु रुपियाँ है दूजा,

जिन्हे भी चाहो इष्ट बना लो दोनों ही सुख धाम सदा,

महलो में जब जन्मे रघु वर कोई नहीं सो पाया था,

कारा वास में जन्मे कान्हा जाग कोई न पाया था,

माता दूध पिया था राम ने वृंष्टि रहे थे कृष्ण सदा,

जिन्हे भी चाहो इष्ट बना लो दोनों ही सुख धाम सदा,

झूठे बेर राम ने खाये कृष्ण सदमा के कंदुल,

सागर रास्ता दिए राम को सांवरिया को यमुना जल,

रावण का वध राम ने किना कृष्ण कंस का काल बना,

जिन्हे भी चाहो इष्ट बना लो दोनों ही सुख धाम सदा,

धनुष वान ले हाथ राम जी स्वयं लड़े थे पापी से,

हाथ सुदरसन चकर ले कान्हा बने स्वार्थी साथी के,

राम चतिर गरंथ राम का गीता कृष्ण का गरंथ यहाँ,

जिन्हे भी चाहो इष्ट बना लो दोनों ही सुख धाम सदा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।