काशी भी तेरी तेरा केदार है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तीनो लोको में तेरा ही गुणगान हो

कौन है जिसपे तेरा एहसान हो,

तेरी महिमा अमर हे शिव शंकर,

हर युग में तेरी जय जय कार है,

काशी भी तेरी तेरा केदार है,

देख के इसको जब देव गबरा गये,

याद तुम को किया और तुम आगये,

करि सब पे मेहर पी गये खुद ज़हर,

तुमसे दूजा न कोई मदत गार है,

काशी भी तेरी तेरा केदार है,

कोई कण भी नहीं शन भी नहीं,

जो शिव का नहीं जो शिव में नहीं,

जल ने भी है तू थल में भी है तू

तू नीरा कार है साकार है,

काशी भी तेरी तेरा केदार है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।