हम तो कंवर उठा के चले है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हम तो कंवर उठा के चले है,

दुःख ये शिव से अपना कहे गे,

सारी दुनिया है भक्ति की दुश्मन,

भक्त तेरे ये कैसे जिये गे,

हम तो कंवर उठा के चले है,

शिव की भक्ति में हम खो गये है,

चोला भगमा पहन कर है निकले,

नंगे पाँव ही चलते रहे गे,

चाहे जितने भी छाले पड़े गे,

हम तो कंवर उठा के चले है,

मुँह से बम बम है निकल ता,

आँखों में धाम शिव का दिसता,

गंगा जल है ये पीड़ा के आंसू,

शिव के चरणों को धो के रहे गे,

हम तो कंवर उठा के चले है

मेरे शिव जी ही माता पिता है,

मेरे बंधू शिव जी सखा है,

शिव की तीर्थो की यात्रा करेंगे,

शिव से वरदान मुझको मिले गे,

हम तो कंवर उठा के चले है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।