भोले के चेले बड़े हैं अलबेले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले के चेले बड़े हैं अलबेले,

भूति भोले की चढ़ा के कंधे कांवड़ उठा के,

सब छोड़ के झगडे झमेले,

भोले के चेले बड़े हैं अलबेले

ओ दी जे वाले तू साउंड बड़ा ले,

कोई लाज ना लिहाज नाचू झूम झूम आऊ,

चाहे पाँव में पड़ गए छाले,

भोले के चेले बड़े हैं अलबेले

ये काले बादल भोले के है काजल,

भीगे काजल की धार जब पड़े है फुहार,

कहे मन भोले के दर चल ले,

भोले के चेले बड़े हैं अलबेले.......

जीत तेरी होगी तू भोले का है जोगी,

जीतू कावड़ सम्बाल भोले रखे गे ख्याल,

अब छोड़ दे झड़े ज्मेले,

भोले के चेले बड़े हैं अलबेले.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।