नंदी बैल पर चढ़ कर आई

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बस्म लगा कर भांग चड़ा कर भूतो को ले साथ,

नंदी बैल पर चढ़ कर आई भोले की बारात,

तीन लोक के दाता कैसे मस्त्कलंदर बन बेठे,

कैसा अद्भुत खेल रचाया बिलकुल बंदर बेठे,

ब्रह्मा विष्णु देबता घन भी सारे ही टकराए है,

सारे जग ले मालिक देखो कैसे वेश में आये है,

ना जाने कौन सी लीला दिखाये गे आज,

नंदी बैल पर चढ़ कर आई भोले की बारात,

रूप रचया रचने वाले ने कैसा आज अनोखा,

जो भी देखे त्रिलोकी को वो खा जाये धोखा,

आगे पीछे नाच रही है बस भूतो की टोली,

बीच में शंकर शम्भू झूमे बन उनके हम झोली,

आज तलक ना देखि किसी ने एसी कही बारात,

नंदी बैल पर चढ़ कर आई भोले की बारात,

नाच रहा खुद डमरू खुद ही नाच रहा तिरशूल,

तीन लोक के स्वामी है खुद आज गए वो भूल,

गूंज रही है चारो तरफ ही भूतो की किलकारी,

देख के रूप जटाधारी का भाग रहे नर नारी,

शर्मा शीश झुकाए तेरी जय हो भोले नाथ,

नंदी बैल पर चढ़ कर आई भोले की बारात,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।