सारे जगत में हां एक तू तू ही तुहि

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सारे जगत में हां एक तू तू ही तुहि,

तू ही तुहि तू ही तुहि,

मेरी डोर तुझसे बाबा तेरे सुमिरन से ऐसी जुडी है,

चाहे जाऊ जिस तरफ भी खुशियां भाहे फैलाये खड़ी है,

मेरे घर में तेरी प्रेम गंगा बही सब है तुझसे मैं था कुछ भी नहीं,

कुछ भी नहीं मेरा तो सब कुछ एक तू,

तू ही तुहि तू ही तुहि,

मेरे भाग के ओ माली फूल खिलते रहे इस चमन में,

तुझे और क्या मैं मांगू करता हु तुझको कोटि नमन मैं,

तू दयालु बड़ा तुझसे कोई नहीं,

सरे संसार में बाबा कोई नहीं,

कोई नहीं कोई नहीं भोला है भोला जोगियां,

तू ही तुहि तू ही तुहि,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।