शृंगार गज़ब तेरा माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शृंगार गज़ब तेरा माँ किसने सजाया है,

कही लग न जाए किसी की नजर,

ताजे फूलो से आंगन महक रहा,

तेरा चंदा सा मुखड़ा दमक रहा,

मन मोहक शृंगार तेरा और जन्नत सा दरबार तेरा,

कही लग न जाए किसी की नजर,

ऐसी मेहँदी की लाली ना देखि कही,

ऐसी चुनरी ना आई नजर में कही,

जो तुम से जुड़ जाता है अनुपम ही हो जाता है,

कही लग न जाए किसी की नजर,.....

तेरे मुखड़े से नजरें हटती नहीं,

तेरे दर्शन से आंखे थक ती नहीं,

काल कहे तुम सा सूंदर माँ कोई नहीं है धरती पर,

कही लग न जाए किसी की नजर,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।