सझ धज भोले भंडारी आये है,

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सझ धज भोले भंडारी आये है,

नंदी पे सवारी विष धरी आये है,

आई भोले की बारात ऋषि देव गण साथ,

ब्रह्मा विष्णु के संग त्रिपुरारी आये है,

सझ धज भोले भंडारी आये है,

बड़ा ही अजीब रूप भोले ने रचाया है,

श्रिष्टि का नाथ कैसा बन कर आया है,

तन भसम लगाए नाग गले लिपटाये खोली अपनी जताये जता धरी आये है,

सझ धज भोले भंडारी आये है....

आगे और पीछे भूत प्रेट्टो की है टोलियां,

चारो ही तरफ गूंज रही किल कारियाँ,

जो भी देखे वही हाय डरी डरी देखो जाए,

आज आफत के संग हाहा कारी आये है,

सझ धज भोले भंडारी आये है,

नंदी पे सवार शिव डमरू भजाते है,

डमरू पे भूतो की बारात को नचाते है,

दास शर्मा ये बोले तेरी जय हो शिव भोले,

तेरी लेने आज हम सेवाधारी आये है,

सझ धज भोले भंडारी आये है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।