तेरी ज्योत जगाऊँ दिन रात

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॥ पावन पाठ ॥

तेरी ज्योत जगाऊँ दिन रात,

मेरा मन ऐसा करे,

ऐसा करे ऐसा करे मन मेरा ऐसा करे,

तेरी ज्योत जगाऊँ दिन रात,

तेरी बगियाँ का फूल बन जाऊ,

तेरे चरणों की धूल बन जाऊ,

मुझे गोदी में बिठा के करो प्यार,

मेरा मन ऐसा करे,

तेरी ज्योत जगाऊँ दिन रात

करू चरनन में तन मन अर्पण,

देदो बाबा मुझको दर्शन,

मुझे चरणों से लगा लो एक बार,

मेरा मन ऐसा करे,

तेरी ज्योत जगाऊँ दिन रात

एक झलक तेरी पाने को,

मन करता शिरडी आने को,

तुम्हे भजन सुनाऊ दिन रात,

मेरा मन ऐसा करे,

तेरी ज्योत जगाऊँ दिन रात

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।