बड़ी दूर से चल कर आया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बड़ी दूर से चल कर आया हु मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए,

इक फूल गुलाब का लाया हु चरणों में तेरे रखने के लिए,

न रंग महल की अभिलाषा ना ईशा सोने चांदी की,

तेरी दया की दोलत काफी है,

झोली मेरी भरने के लिए,

बड़ी दूर से चल कर आया हु .....

न हीरे मोती न सोना है,

ना धन दोलत की थैली है,

दो आंसू बचा कर लाया हु,

पूजा तेरी करने के लिए,

बड़ी दूर से चल कर आया हु.......

मेरे बाबा मेरी ईशा नही अब यहाँ से वापिस जाने की,

चरणों ने जगह देदो थोड़ी,

मुझे जीवन भर रहने के लिए,

बड़ी दूर से चल कर आया.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।