नज़र में रहती हो मगर तुम नजर नहीं आती

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नज़र में रहती हो मगर तुम नजर नहीं आती,

ये दिल भुलाये माँ तुम्हे पर तुम नहीं आती,

नज़र में रहती हो मगर तुम नजर नहीं आती,

सांसो की हर डोर पुकारे मेरी माँ,

नैना तुझको ही ढूंढे है मेरी माँ,

तू जो नैनो में आ जाये मेरे,

नैनो को बंद करलु मेरी माँ,

इधर नहीं आती क्यों तुम इधर नहीं आती,

ये दिल भुलाये माँ तुम्हे पर तुम नहीं आती,

नज़र में रहती हो मगर तुम नजर नहीं आती,

होता है अबास तुम्हारा मेरी माँ,

लगता है तू पास खड़ी है मेरी माँ,

गिरने से पहले ही संभालो गी हमको यकीन है मेरी माँ,

मेहर नहीं करती भला तू क्यों मेहर नहीं करती,

ये दिल भुलाये माँ तुम्हे पर तुम नहीं आती,

नज़र में रहती हो मगर तुम नजर नहीं आती,

रीवा तेरा नाम जापे है मेरी माँ,

हर पल तेरी राह तके है मेरी माँ,

तेरे आने की आस लिए दिल में,

तक तक नैना थके है मेरी माँ,

खबर नहीं लेती हमारी खबर लेती

ये दिल भुलाये माँ तुम्हे पर तुम नहीं आती,

नज़र में रहती हो मगर तुम नजर नहीं आती,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।