रोनका लगाइयाँ भारी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रोनका लगाइयाँ भारी,

करना आज दीदार मैया दा वारो वारि,

रोनका लगाइयाँ भारी...

कई ने साईकल कई ने पैदल कई कारा विच आये,

सिरा ते लेके लाल चुनरियाँ मथे तिलक लगाए,

बैठ के आये विच लारी,

कई आये ने बह के रोडवजे दी वारि,

रोनका लगाइयाँ भारी....

पूरियां छोले खीर दे भगता लंगर लगाए,

भगता संगता दे राहा विच देखो नैन विशाये,

संगत सारी दी सारी भगता दे विच बह के शक दी लंगर संगत सारी,

रोनका लगाइयाँ भारी.....

सोहनिया सोहनियाँ भेटा गए के मन न मोहि जावन,

ढोलक चिमटा शेहने लेके उची जय कारे लावन,

मारन संगता ताली हरी अमित नाल रल के मारन संगता ताली,

रोनका लगाइयाँ भारी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।