चल चलिए आजा मैया दे द्वारे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चल चलिए आजा मैया दे द्वारे उते चल चलिए,

लेके नाम दे सहारे ओहदे भूहे मलिये,

चल चलिए आजा मैया दे द्वारे उते चल चलिए,

छड़ के दुनिया माँ नु मना लाए मन विच माँ दा नाम वसा ले,

जीना माँ दे लई गुजरा आजा टूर चलिए,

आजा दाती दीरंगा विच रंग रंगिये,

चल चलिए आजा मैया दे द्वारे उते चल चलिए,

माँ दा प्यार अनोखा भगता मिलना नहियो यह सोखा भगता,

अथो मिलदे सहारे गल पल्ले बनाइये

आजा दाती दी रजा विच रंग रंगिये,

चल चलिए आजा मैया दे द्वारे उते चल चलिए,

महिमा लिखदे शुभाष दीवाना,

वीर सिकंदर ने गुण गाना,

लेके नाम दे प्यारियाँ नु संग चलिए,

आजा दाती दी रजा विच रंग रंगिये,

चल चलिए आजा मैया दे द्वारे उते चल चलिए,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।