सजल नयने रूप पाहू मी कैसे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

पाहीन लोचने भरुनी,

म्हणता भरुन लोचने आली,

सजल नयने रूप पाहू मी कैसे ,

रंग तुझा कधी रे घननीळा ,

कधी सावळा , कधी रे काळा

वाजविसी मुरली कान्हा (कैसे) ,

कर कटेवरी ठेवोनी ,

संगे धनुर्धर अनुज दिसे मज,

कधी दिसे तो गदाधर अग्रज,

वामे शोभे सीता माई कि रखुमाई माउली ,

मिटून लोचने नमुनी माथा ,

मुखी नामाचा गजर करिता

रूप तुझे हृदयात प्रगटले धन्य धन्य माउली ,

सजल नयने रूप पाहिले ऐसे पाहिले लोचने भरुनी ,

गीत - संगीत : अरुण सराफ

गायिका : कार्तिकी गायकवाड

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।