एक पत्थर था मैं आपने

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॥ पावन पाठ ॥

एक पत्थर था मैं आपने मुझको पारस की तरह किया,

हर घड़ी जोड़ कर हाथ में गुरुदेव करो शुकरीयाँ,

एक पत्थर था मैं आपने...

झूठ और सत्ये का मुझको ज्ञान दियां,

चरणों में रख मुझको तूने मान दिया,

ज्ञान की रोशनी मुझे दी आपने,

ज़िन्दगी के अंधेरो को को दूर किया,

आप के रूप में लगता है जैसा इश्वर मुझे मिल गया,

हर घड़ी जोड़ कर हाथ में गुरुदेव करो शुकरीयाँ,

एक पत्थर था मैं आपने...

आप के चरणों में मिल गई है जगह,

अब जमाने से कुछ भी नही वास्ता,

रास्तो की खबर तक नही थी मुझे,

आप की किरपा से मंजिले पा गया,

गुरु देव दया आप की दिया जीने का जो होंसला,

हर घड़ी जोड़ कर हाथ में गुरुदेव करो शुकरीयाँ,

एक पत्थर था मैं आपने...

पीछे पीछे चलो ले चलो तुम यहाँ,

आप के बिन मेरा अब बाजूद कहा,

दीपक परशाई है गुरु वर आप की आप के चरणों में अब मेरा आशिया,

शर्मा कटपुतली है आप की जैसे चाहे लो इसको नचा,

हर घड़ी जोड़ कर हाथ में गुरुदेव करो शुकरीयाँ,

एक पत्थर था मैं आपने...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।