भोला दानी रे भोले दानी

गिरधर महाराज
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोला दानी रे भोला दानी,

भोला दानी भोला दानी भोला निराला,

पिये सदा भंगिया का प्याला,

काले काले रे काले काले,

काले नागों की माला को अपने गले में है डाले,

जो चाहे मांगो जो चाहे ले लो,सोना चांदी हीरा मोती,

सब देने वाला रे भोला दानी भोला दानी,

भोले बाबा जी के सब हैं पुजारी नर हो या नारी,

ये सब संसारी दर के भिखारी,

सारे भक्तों के हितकारी त्रिशूलधारी भोले भंडारी नंदीवाले नागधारी ॥

अब तक किसी को भी देकर निराशा,

इसने कभी अपने दर से ना टाला रे भोला दानी भोला दानी...

सबसे बड़े जग में है यही ज्ञानी भोले वरदानी त्रिशूल पाणी,

शिव औघड़ दानी रे ।

गाते हैं सब इनकी वाणी यह जग के प्राणी पंडित और ज्ञानी, राजा रानी जोगी ध्यानी ॥

जपता सदा शर्मा है जिसकी माला,

कहलाता है शिव डमरू वाला रे भोला दानी भोला दानी...

स्वर: गिरधर महाराज

भाटापारा छत्तीसगढ़

मो.9300043737

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।