छोडकर जाना होगा

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॥ पावन पाठ ॥

नफरत ना कर इंसान,

यहां तूं दो दिन का मेहमान,

छोडकर जाना होगा,

फिर नहीं आना होगा..

यश का तेरे गान भी होगा,

सत्कर्मों का बखान भी होगा,

कीरत रह जाएगी तेरी,

सीरत मिट जाएगी,

ना कर व्यर्थ गुमान,

छोड कर..

जब तक प्राण हैं तन में तेरे,

जग में सब अपना है,

छोड चले जब प्राण देंह को,

झूठा सब सपना है,

ना कर तूं अभिमान,

छोड कर..

जग का मालिक वही विधाता,

सबका पालनहारा है,

उसके सिवा इस दुनियां में,

कोई नहीं तुम्हारा है,

तूं समझ ले ऐ इंसान,

छोड कर..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।