आज अपनी संगत में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन साईं भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आज अपनी संगत में बाबा का होना लाजमी है,

ये दीवानो की महफ़िल है दीदार का होना लाजमी है,

आज अपनी संगत में बाबा का होना लाजमी है,

ज़माने के हर एक इंसान पे नजरे यमाता हु,

ना जाने कौन से इंसान में दीदार हो जाये,

कर्म इतना तो मुझ पर है साई सरकार हो जाये,

निगाहे ढूंढ़ती रह जाये और दीदार हो जाये,

हम साई साई बोले गे दिद्दार का होना लाज मी है,

आज अपनी संगत में बाबा का होना लाजमी है,

मेरी तकदीर में लिखा था मैंने तुझको पाया है,

खुदा भी है मेरा और पीर का भी मुझपे साया है,

खुशा किस्मत के उमीदे कर्म इस दर पे लाया है,

तुम्हारी याद ने मुझको मेरे रब से मिलाया,

हम साई साई बोले गे दीदार का होना लाजमी है,

आज अपनी संगत में बाबा का होना लाजमी है,

हज़ारो ख्वाइशे ऐसी के हर खवाइश पे दम निकले,

उदर से तू नजर आये इधर से और हम निकले,

तुम्हारे दर पे हमसर भी भिखारी बन के आया है,

सभी ने मुझको ठुकराया मेरे साई ने निभाया है,

ये दीवानो की महफ़िल है दीदार का होना लाजमी है,

आज अपनी संगत में बाबा का होना लाजमी है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।