जब दर्द हो भक्तों को

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॥ पावन पाठ ॥

जब दर्द हो भक्तों को,

मेरे साई को भी होता,

जब नींद ना आये हमे मेरा साई भी नहीं सोता

जब दर्द हो भक्तों को...

इक साई ही है जग में हर रिश्ते निभाता है,

हर मुश्किल में बाबा बस दौड़ा आता है,

कोई और नहीं दीखता साई सामने जब होता,

जब नींद ना आये हमे मेरा साई भी न सोता,

जब दर्द हो भक्तों को,

जो डोर बन्धी उसको हम कैसे छुड़ाए गे,

जो है उपकार किये हम कैसे भुलाये गे,

मेरी मिट जाती हस्ती अगर साई नहीं होता,

जब नींद ना आये हमे मेरा साई भी न सोता,

जब दर्द हो भक्तों को,

बाबा ने किरपा अपनी जब से बसराई है,

मेरी मुरझाई बगियाँ फिर से महकाई है,

हमे इतना दिया उसने कभी कम ही नहीं होता,

जब नींद ना आये हमे मेरा साई भी न सोता,

जब दर्द हो भक्तों को,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।