भिखारी के घर में दाता पधारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भिखारी के घर में दाता पधारे,

बड़े ही अनोखे है भाग्ये हमारे,

भिखारी के घर में ....

करुणा का सिंधु आया है चल कर,

सागर ही आ गया प्यासे के दर पर,

आये थे राम जैसे भीलनी के द्वारे,

बड़े ही अनोखे है भाग्य हमारे,

भिखारी के घर में दाता पधारे,

कभी सोचता हु सच है या सपना,

सँवारे के लायक तो नहीं घर ये अपना,

टुटा सा घर है टूटी दीवारे,

बड़े ही अनोखे है भाग्य हमारे,

भिखारी के घर में दाता पधारे,

कहा मैं बिठाऊ क्या मैं खिलाओ,

स्वागत में इसको क्या पहनाऊ,

बिक्शा में सब कुछ इसी से मिला रे,

बड़े ही अनोखे है भाग्य हमारे,

भिखारी के घर में दाता पधारे,

सदा इसके दर पे जाता हु लेने,

आज मेरा सेठ खुद ही आया है देने,

बिनु तुम्हारे तो हुए वारे न्यारे,

बड़े ही अनोखे है भाग्य हमारे,

भिखारी के घर में दाता पधारे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।