शिर्डी की माटी की तिलक लगा ले

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

शिर्डी की माटी की तिलक लगा ले,

लाखो किस्मत चमकी अपनी भी किस्मत चमका ले,

ये गाँव है मेरे साई का अपनी किस्मत चमका ले,

शिर्डी की माटी की तिलक लगा ले....

बड़ी धन्य धन्य ये माटी अवतार लिया साई ने,

दरबार लगा कर अपना उपकार लिया साई ने,

शिर्डी की माटी की तिलक लगा ले...

इस माटी का क्या कहना यहाँ पाँव पड़े साई के,

ये माटी है चमत्कारी यहा झंडे गड़े साई के,

शिर्डी की माटी की तिलक लगा ले...

शिरडी की इस माटी से तू कंकर चुग ले जाना,

हीरे मोती से महंगे और है अनमोल खजाना,

शिर्डी की माटी की तिलक लगा ले....

जिस चरणों की माटी के खातिर है देव तरस ते,

वनवारी मिल गये है हम को शिरडी के रस्ते,

शिर्डी की माटी की तिलक लगा ले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।