भूतो की बरात आ गई

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कैसी अध्भुत देखो आज रात आ गई,

संग भोले के भूतो की बरात आ गई,

पी भांग धतूरा बने पुरे जमूरा,

तन भस्म लगाए करे सांग जपुरा,

की बैल सवारी भोले भंडारी,

तीनो लोक के स्वामी बने केश मदारी,

कैसी ये अलग सौगात आ गई,

बम भोले के भूतो की बरात आ गई..

कई मुंडी नाचे कही पायल भाजे,

कई कई में कोई बिन पैर ही नाचे,

भूतो की टोली जय शम्भू बोली.

कैलाश पति है जिनके हम झोली,

ऐसे लगे आफत कोई आज आ गई,

बम भोले के भूतो की बरात आ गई..

बाई हाहाकारी भागे नर नारी,

क्या सांग रचाकर आये जग दारी,

ब्रह्मा मुस्काये विष्णु हर्षाये कोई राज छुपा है आँखों से बताये,

बड़ी ही अनोखी करा माता आ गई,

बम भोले के भूतो की बरात आ गई..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।