मैया जी सानु रोज ही मिलया करो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया जी सानु रोज ही मिलया करो,

कोई गल सुनानी हुंडी है,

दर्शन दे प्यासे नैना दी माँ प्यास बनानी हुंडी है,

मैया जी सहनु रोज ही मिलिया करो,

तेरे दर दे डेरा लाया है मन मंदिर खूब सजाया है,

असी मन दे शीशे ते तस्वीर बनाई हुंडी है,

मैया जी सानु रोज ही मिलया करो,

झोली है खाली भरन ली,

इस भाव सागर तो तरन लाई,

चरना दी धूलि मस्तक ते असी रोज लगानी हुंडी है,

मैया जी सानु रोज ही मिलया करो....

जड़ो किस्मत अँखियाँ फेर लवे,

जदों संकट सहनु गेर लावे,

मेरी दीन दयालु मैया जी कोई भूल भक्शानी हुंडी है,

मैया जी सानु रोज ही मिलया करो,

तेरे दर ते सदा दिवाली है,

तेरे पैरा विच खुशहाली है,

झंडे वाली असी सदा तेरी जयकार भुलाई हुंडी है,

मैया जी सानु रोज ही मिलया करो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।