रंगना में तन मन रंगना

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रंगना में तन मन रंगना,

फुला दिया विशावा पतियाँ,

तारियाँ दियां जगावा बतियाँ,

रंगना में तन मन रंगना ....

बेनती करा गा मैं घर विच आन दी,

जांच मेनू आंदी नही माई नु मनान दी,

रंगना में तन मन रंगना......

देख के प्यार मेरा घर मेरे आएगी,

मेनू विश्वाश मेनू चरनी बिठाई गी,

मैं ता भगती दा दान तेतो मंगना,

रंगना में तन मन रंगना .....

करके दीदार होश दर्शी नु रही ना,

तक दा रह मैं मुहो गल कोई कही न,

हो जाये न मेतो कोई भी उलंगना,

रंगना में तन मन रंगना

आपने ही रंगा विच सराया नु रंग दे,

झंडे वालिये नि तेतो एहो वर मंगदे,

सादी होर तेरे आगे कोई मंग न,

रंगना में तन मन रंगना

लखा ते करोड़ा दाती तेरे ने दीवाने,

मस्ती च नच्दे ने तेरे मस्ताने,

पर सादे जेहा कोई भी मलंग न,

रंगना में तन मन रंगना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।