मेरी लगी श्याम संग प्रीत

विनोद अग्रवाल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने २-

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने २-

क्या जाने कोई क्या जाने २-

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने २-

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने २-

छवि लगी मन श्याम की जब से २-

भई बावरी मैं तो तब से २-

बाँधी प्रेम की डोर मोहन से २-

नाता तोड़ा मैंने जग से २-

ये कैसी पागल प्रीत ये दुनिया क्या जाने २-

ये कैसी निगोड़ी प्रीत ये दुनिया क्या जाने २-

क्या जाने कोई क्या जाने २-

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने २-

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने २-

मोहन की सुन्दर सूरतिया २-

मन में बस गयी मोहनी मूरतिया २-

जब से ओढ़ी शाम चुनरिया २-

लोग कहे मैं भई बावरिया २-

मैंने छोड़ी जग की रीत ये दुनिया क्या जाने २-

क्या जाने कोई क्या जाने २-

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने २-

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने २-

हर दम अब तो रहूँ मस्तानी २-

लोक लाज दीनी बिसरानी २-

रूप राशि अंग अंग समानी २-

हे रत हे रत रहूँ दीवानी २-

मई तो गाऊँ ख़ुशी के गीत ये दुनिया क्या जाने २-

क्या जाने कोई क्या जाने २-

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने २-

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने २-

मोहन ने ऐसी बंसी बजायी २-

सब ने अपनी सुध बिसरायी २-

गोप गोपिया भागी आई २-

लोक लाज कुछ काम न आई २-

फिर बाज उठा संगीत ये दुनिया क्या जाने २-

क्या जाने कोई क्या जाने २-

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने २-

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने २-

भूल गयी कही आना जाना २-

जग सारा लागे बेगाना २-

अब तो केवल शाम सुहाना २-

रूठ जाये तो उन्हें मनाना २-

अब होगी प्यार की जीत ये दुनिया क्या जाने २-

क्या जाने कोई क्या जाने २-

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने २-

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने २-

हम प्रेम नगर की बंजारन २-

जप तप और साधन क्या जाने २-

हम शाम के नाम की दीवानी २-

नित नेम के बंधन क्या जाने २-

हम बृज की भोली गंवारनिया २-

ब्रह्म ज्ञान की उलझन क्या जाने २-

ये प्रेम की बाते है उद्धव २-

कोई क्या समझे कोई क्या जाने २-

मेरे और मोहन की बातें २-

या मै जानू या वो जाने २-

क्या जाने कोई क्या जाने २-

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने २-

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने २-

शाम तन शाम मन शाम हैं हमारो धन २-

आठो याम पूछो हमें शाम ही सो काम हैं २-

शाम हिये शाम पिए शाम बिन नाही जिए २-

आंधें की सी लाकडी आधार शाम नाम है २-

शाम गति शाम मति शाम ही हैं प्राणपति २-

शाम सुख दायी सो भलाई आठो याम हैं २-

उद्धव तुम भये बवरे पाथी ले के आये दोड़े २-

हम योग कहा राखे यहाँ रोम रोम शाम है २-

क्या जाने कोई क्या जाने २-

मेरी लगी श्याम संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने २-

मुझे मिल गया मन का मीत ये दुनिया क्या जाने २-

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।