सोच के निकला था तेरे से सब कुछ मांगूगा, ये भी मांगूगा तेरे से वो भी मांगूगा

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सोच के निकला था तेरे से सब कुछ मांगूगा,

ये भी मांगूगा तेरे से वो भी मांगूगा,

लेकिन जब तेरे सामने आया सब कुछ भूल गया.,

मुझे याद रही बस तू ही तू माँ झंडेवाले तू ही तू,

खाली झोली लेके गया था मैया मैं तेरे दर पे,

बड़ी बड़ी फर्यादे थी जब निकला था घर से,

बेटा मंगू गा तेरे से बेटी मंगू गा,

मेहरो भरे खजाने वाली पेटी मंगू गा,

लेकिन जब तेरे सामने आया सब कुछ भूल गया.,

मुझे याद रही बस तू ही तू माँ झंडेवाले तू ही तू,

क्या मांगू क्या न मांगू मैं फेंसला कर न पाया,

मैंने सोचा मांग लूँगा मैं जो भी मन में आया,

शोरत मांगू गा तेरे से दोलत मांगू गा,

लम्बी उम्र को पाने की मैं मोहलत मांगू गा,

लेकिन जब तेरे सामने आया सब कुछ भूल गया.,

मुझे याद रही बस तू ही तू माँ झंडेवाले तू ही तू,

मुझे पता था मैया दर से खाली नही लोटाती,

देना होता है जब माँ ने तभी वो हमे भुलाती,

दर्शन मांगू गा मैया से किरपा मांगू गा,

मैया मैं तेरे दर से अब तुझको मांगू गा,

लेकिन जब तेरे सामने आया सब कुछ भूल गया.,

मुझे याद रही बस तू ही तू माँ झंडेवाले तू ही तू,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।