श्याम ये दूरियां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कैसी मजबूरियां श्याम ये दूरियां,

तूने मुझसे बनाई बता तो ज़रा,

मैं भी हु वही तू भी है वही,

फिर क्यों नजरे चुराई बता तो सही,

जब मैं पहले तेरे द्वार आता था श्याम,

तू मुझे देख कर मुस्कुराता था श्याम,

क्या खता हो गई क्या वजा हो गई,

फिर क्यों पलके झुकाई बता तो ज़रा,

कैसी मजबूरियां श्याम ये दूरियां,

तूने मुझसे बनाई बता तो ज़रा,

लाख कोशिश भी की तू नहीं मनाता,

क्यों ख़फ़ा है मोहन दिल नहीं जनता,

अब बोल भी दे लब खोल भी दे,

जो ये धड़कन बड़ाई बता तो ज़रा

कैसी मजबूरियां श्याम ये दूरियां,

तूने मुझसे बनाई बता तो ज़रा,

सतविंदर को क्यों दे रहा है सजा,

मैं पिगल जाऊ गा न मुझे आज़मा,

आस्क गिर जायेगे और बिखर जाये गए,

क्यों ये आंखे रुलाई बता तो ज़रा,

कैसी मजबूरियां श्याम ये दूरियां,

तूने मुझसे बनाई बता तो ज़रा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।