जग प्रेम बड़ा बलधारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जग में प्रेम बड़ा बलधारी ।

जो कोई जन प्रेम से पुकारे, आ जावे गिरधारी॥

नरसी मेहता ने सतगुरु मिलिया, माया लुटा दी सारी।

राधा-रुखमण संग में आई, लाज राखी भक्तां री ॥

जग में प्रेम .......

प्रेम भाव से खीचड़ो बनायो, वा बेटी जाटा री।

धाबलिया को पर्दो किदो, भोग लगायो बनवारी॥

जग में प्रेम .......

प्रेम बिना भक्ति लागे फीकी, प्रेम की महिमा भारी।

प्रेम भूखा प्रभु आवे द्वार पर, वेद संन्त पुकारि ॥

जग में प्रेम .......

लादूदास म्हाने सतगुरु मिलिया, धरिया रूप साकारी ।

कहत चम्पा लाल प्रजापति , करज्यो भाव से पारी ॥

जग में प्रेम .......

( प्रजापति म्यूजिकल ग्रुप 89479-15979 )

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।