तेरे प्यारे जय साईं जय साईं बोल के नाचे गे

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॥ पावन पाठ ॥

सुन सच्चदानन्द साईं आज दिल खोल के नाचे गे,

तेरे प्यारे जय साईं जय साईं बोल के नाचे गे,

खुशियों की घड़ी है आई तूने रहमत बरसाई,

सुख में दुःख में है दाता तूने हो प्रीत निभाई,

दिल में अमृत खुशियों का आज बोल के नाचे गे,

तेरे प्यारे जय साईं जय साईं बोल के नाचे गे,

मस्ती में मस्तानो को साईं के दीवानों को,

साईं की लगन लगी है दुनिया से बेगानों को,

मस्ताने हम दीवाने आज संग ढोल के नाचे गे,

तेरे प्यारे जय साईं जय साईं बोल के नाचे गे,

उम्मीद से ज्यदा बक्शा बिन मांगे दिया हमेशा,

भक्तो का हर दुःख संकट तूने हर लिया मेरा,

साहिल एहसास के पंशी आज तोल के नाचे गे,

तेरे प्यारे जय साईं जय साईं बोल के नाचे गे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।