पड़या करो पड़या करो बार बार बानी पड़या करो

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॥ पावन पाठ ॥

पड़या करो पड़या करो बार बार बानी पड़या करो,

सुनिया करो सुनिया करो बार बार बानी सुनिया करो,

ऐ बानी है धुर की बानी,

ऐ बन्देया तेरे नाल है जानी,

सचखंड दा ही देर,बानी सुनिया करो,

अमिरत वेले अमृत वरसे,

बानी नु जद तन मन तरसे,

छड आलस कर इंसान बानी सुनियाँ करो,

क्यों चिंता विच होया छुटे,

आपे करता कारज पुरे,

रूह तों करी पुकार,

बानी सुन्या करो.

Babita सिखिनि

९७२९३७६२३२

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।