मैया दूल्हा मोहे बनायदे

पं अशोक कृष्ण ठाकुर जी महाराज
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैया दूल्हा मोहे बनाय दे,

मरवट माथे पै लगवायदे अपने हाथ की,

मोकू लायदे दुल्हनिया यमुना पार की......

बहुत दिना तेरी गाय चराई हुक्म कबहु नायें टारयो,

सब ग्वालन के फैरे पड़ गये मैं ही रह गयो क्वारो,

मैया तू ही व्याह करवायदे मिठाई माखन की खवायदे अपने हाथ की,

मोकू लायदे दुल्हनिया यमुना पार की........

काऊ अच्छे से घर में करियो रिस्तेदारी मेरी,

गौरी सी एक होये दुल्हनिया होये न कल्लो कारी,

मैया तेरे चरण दवावे मेरी सेवा टहल बजावे बडे ही प्यार की,

मोकू लायदे दुल्हनिया यमुना पार की.........

फैसन वाली होये न दुल्हनिया ओढ़े न उल्टो पल्लो,

जा दिन से या घर मे आवे बृज में है जाए हल्लो,

मैया मेरे संग न जावे, मेरे संग बैठ न खावे चाट बाजार की,

मोकू लायदे दुल्हनिया यमुना पार की....

भजन - मैया दूल्हा मोहे बनायदे

स्वर- पं अशोक कृष्ण ठाकुर जी महाराज

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।