हे शिव भोले भंडारी

संजय मित्तल
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हे शिव भोले भंडारी मैं आया शरण तिहारी,

मेरे शिव भोले भंडारी,

भागम भर तेरे अंग पर सोहे हाथ में तिरशूल भारी,

भूत पीताश नीच करे संग में नाचे दे दे ताली,

मेरे शिव भोले भंडारी.......

डम डम डमरू बजाये नंदी की सवारी,

विष को पी कर शन में शिव ने देवो की विपदा ताली,

मेरे शिव भोले भंडारी....

उमा रमन शम्भू त्रिपुरारी भव भये बंजन हारी,

इस विरले दानी की महिमा गावे सब नर नारी,

मेरे शिव भोले भंडारी,

दामोदर की विनती यही है काटो विपदा हमारी,

कष्ट मिटा जग के तुम करदो घर घर में खुशहाली,

मेरे शिव भोले भंडारी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।