आरती करिये शिव शंकर की

पारंपरिक
श्री गणेश आरती शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

आरती करिए शिव शंकर की,

उमापति भोले हरिहर की,

चंद्र का मुकुट शीश पे सोहे,

नाग की माला मन को मोहे,

मुनि मन हारी छवि सुंदर की,

आरती करिए...

जटा से बहती गंगा प्यारी,

जिसने सारी दुनिया तारी,

भोलेनाथ प्रभु गंगाधर की,

आरती करिए....

संग विराजे पार्वती प्यारी,

गणेश कार्तिक की महतारी,

अर्धनारीश्वर गिरजापति की,

आरती करिए...

पीवत सदा जहर का प्याला,

राम नाम का है मतवाला,

नीलकंठ जय रामेश्वर की,

आरती करिए.....

जो शिवनाथ की आरती गावे,

अपनो जीवन सफल बनावे,

विपदा मिटे सदा जन-जन की,

आरती करिए....

रचना एवम स्वर:

गिरधर महाराज,भाटापारा

(छत्तीसगढ़)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।