हद होती है श्याम अब तो आज़माने की

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हद होती है श्याम अब तो आज़माने की,

जान ही लोगे क्या बाबा तेरे दीवाने की,

हद होती है श्याम...

इक तो पहले ही ज़माने का सताया हु मैं,

उसपे गम तेरी जुदाई का दे दिया तूने,

क्या खता है मेरी मुझको ये बताओ बाबा,

क्यों मेरे प्यार का एहसास याद दिया तूने,

हद होती है श्याम...

मैं नहीं कहता मुझे चाँद सितारे दे दे,

ना ही कहता मुझे गुलशन की बहारे दे दे,

मैं तो मांगू वही जो चाह है हारने वाला,

मेरा तो साथ तू हारे के सहारे दे दे,

हद होती है श्याम....

जीतने वालो के जितने भी इम्तेहा लेले.

हारने वालो के दिल से तू श्याम क्यों खेले,

सोनू बतला भी दे हम जैसे बेसरो की दुभ ती कश्तियाँ तूफ़ान को कैसे जिले,

हद होती है श्याम....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।