मन की बातां संवारिये ने

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मन की बातां संवारिये ने,

आज सुना कर देख ले,

सुणसी सुणसी संवारीयो टेर लगा के देख ले,.

मन की बातां संवारिये ने....

गल्ली गल्ली क्यों भटक रहे है,

श्याम खड़े तेरे आगे,

तेरी पीड़ा वोही हरेगा,

चालेगो तेरे सागे,

गेलो टेढ़ो बाबो सीधो बदले भाग्य की रेख रे,

मन की बातां संवारिये ने,

दुनिया से के आस करे से श्याम ही सांचो साथी,

मन दिवले ले जगमग कर ले ,

घाल प्रेम की बाती,

रोम रोम श्याम रमा ले फिर तमाशा देख ले,

मन की बातां संवारिये ने,

खाटू माहि लगी कचेरी श्याम करे सुनवाई,

सांचो न्याय चुकातो आयो जाने पीड़ पराई,

अनिल सुना दे बाता सारी चरणों माथा टेक ले,

मन की बातां संवारिये ने,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।