भोले के साथ पिले

संजय मित्तल
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले के साथ पिले,

मचले यो दिल दीवाना,

दावा है छोड़ देगा मेह्खाने में तू जाना

पीना क्या वो जिसमे इतना नशा ही छाए,

पीते है रात को तो सुबह उतर ही जाये,

उतरे गा ये नशा न जितना भी हो पुराना,

भोले के साथ पिले.......

विष पीने वाले को तो चढ़ता कोई नशा न,

तकदीर ये बदल ता पीने का कर बहाना,

इसको तो गम है पीना अमृत हमें पिलाना,

भोले के साथ पिले.....

गम को भुलाने खातिर पीते है लोग अक्सर,

मिट जाते उनके गम है पीते है यो जहा पर,

जो गम ही न रहे तो फिर किसको है भुलाना.

भोले के साथ पिले.......

भोले के प्यार में तो आशिक़ है ये ज़माना,

आँखों से पी के जिसके सोनू हुआ दीवाना,

अब तो इसी के दर पे जीवन है ये बिताना,

भोले के साथ पिले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।