हरी ॐ की तू माला क्यों न फेरे

संजय मित्तल
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हरी ॐ की तू माला क्यों न फेरे,

मिट जायेगे सब दुःख तेरे,

हरी ॐ हरी ॐ

वो भोला भंडारी है भगतो का प्रति पाला,

निर्धन के मन वास करे श्रिस्ति रचाने वाला,

क्यों भुला है कॉल को तेरे,

हरी ॐ की तू माला क्यों न फेरे,

जो इन पे विश्वाश करे पूरी करे वो आशा,

कभी न उसको निराश करे कभी न राखत पयासा,

भंडार भरे वो तेरे,

हरी ॐ की तू माला क्यों न फेरे,

बहुत बड़ा वो दानी है पारवती का प्यारा,

निर्धन को है धनि करे जो सब कुछ है वारा,

माला फेरो नित शाम सवेरे,

हरी ॐ की तू माला क्यों न फेरे,

एक बार जो ॐ कहे पापो से छूट जाये,

उसके सिर पे हाथ धरे भक्ति मुक्ति पाए,

काटे जन्म जन्म के फेरे,

हरी ॐ की तू माला क्यों न फेरे,

सच्चे मन से ध्यान धरे वो है शिव को प्यारा,

झूठ कपट का त्याग करो,

आ जाए डमरू वाला,

रहे कदम कदम संग तेरे,

हरी ॐ की तू माला क्यों न फेरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।