मैया ताके न मोरी ओरिया

प्रभाकर कुमार,
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया ताके न मोरी ओरिया

मैं क्या करूँ,

हाय मैं क्या करूँ

रोज रोज तेरे दर पे आऊँ,

मैया रोज रोज तेरे दर पे आऊँ

मैया सुने न अरजिया

मैं क्या करूँ,

मैया ताके न मोरी ओरिया

मैं क्या करूँ,

अँगना बुहारूँ मैं ओसरा बुहारूँ,

मैया अँगना बुहारूँ मैं ओसरा बुहारूँ

तइयो न लेलहिन मोर खबरिया

मैं क्या करूँ,

मैया ताके न मोरी ओरिया

मैं क्या करूँ,

जग में तोहर कोई न सानी

पूजा पाठ की विधि नाहि जानी

कोई बतावे नाहि विधिया

मैं क्या करूँ,

मैया ताके न मोरी ओरिया

मैं क्या करूँ,

का गलती हुई बता दे माई

बेटा कुपुत्र होला, माई न कुमाई

मैया बतावे न मोर गलतिया

मैं क्या करूँ,

मैया ताके न मोरी ओरिया

मैं क्या करूँ,

मैं क्या करूँ,

रचनाकार-प्रभाकर कुमार,

माँ काली मन्दिर

मालवीया नगर सोहजाना

गिद्वौर जमुई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।