मैं तो शिव की पुजारन बनूँगी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मैं तो शिव की पुजारन बनूँगी,

अपने भोले की जोगन बनूँगी,

मैं तो पहनुँगी जोगन का चोला,

वो है पारस महादेव भोला,

चरण छु कर मैं कुंदन बनूँगी,

अपने भोले की जोगन बनूँगी,

मैं तो शिव की पुजारन बनूँगी,

नही मिलते है अनुरागियों को,

शिव तो मिलते है बैरागियो को,

मैं भी उनकी बैरगान बनूँगी,

अपने भोले की जोगन बनूँगी,

मै तो शिव की पुजारन बनूँगी,

अपने भोले की जोगन बनूँगी,

करके जी जान से उसकी भक्ति,

शिव से माँगूंगी नारी की मुक्ति,

नारी जाती का दर्पण बनूँगी,

अपने भोले की जोगन बनूँगी,

मै तो शिव की पुजारन बनूँगी,

अपने भोले की जोगन बनूँगी,

मै तो शिव की पुजारन बनूँगी,

अपने भोले की जोगन बनूँगी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।