तेरी गलियो का हु आशिक

बाबा रसिका पागल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरी गलियो का हु आशिक तू एक नगीना है,

तेरी नजरो का मुझे ये जाम पीना है,

तेरी गलियो का.....

तेरे बिन कोई दूसरा नहीं मेरा,

छोड़ू नहीं कस के पकड़ा है दामन तेरा,

तू ही मक्का तू ही काबा तू ही मदीना है,

तेरी गलियो का..........

मेरे हम दम मेरे साथी मेरे साथी हम दम,

तेरी ख़ुशी मेरी ख़ुशी तेरा गम मेरा गम,

तू लहू है जान है तू ही पसीना है,

तेरी गलियों का ....

किस तरह श्रोहड़ पे बुलबुल आशियाना छोड़ दे,

मैं न छोड़ू गा तुझे चाहे ज़माना छोड़ दे,

दिया है दर्द जो भी तूने तू ही दवा देगा,

तू ही दरिया तू ही साहिल तू ही सवीना है,

तेरी गलियो का.....

तेरी नजरो से ये मुझे याम पीना है,

तेरी गलियों का.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।