आधार हो एक तेरा आस एक तेरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आधार हो एक तेरा आस एक तेरी,

ऐसी किरपा मुझपे भी हो प्रभु तेरी,

तेरी किरपा से स्वामी मुझे ये लगन लगी है,

सत पथ की राह टेडी मची मन में खल बलि है,

मिट जाये सब अँधेरा मिल जाये राह तेरी,

आधार हो एक तेरा आस एक तेरी

करू निज कर्म जगत में लेकर के नाम तेरा,

दिल में हो याद तेरी मन में हो ध्यान तेरा,

समजू तेरे इशारे बाते हो तुमसे मेरी,

आधार हो एक तेरा आस एक तेरी

तेरा नाम लेके सोउ तेरा नाम लेके जागू,

सपनो में श्याम सूंदर झांकी तुम्हारी पाउ ,

होगा सफल ये नर तन पा कर के प्रीत तेरी,

आधार हो एक तेरा आस एक तेरी

हसने लगे ये दुनिया तेरा प्यार किस कदर हो,

दुनिया की हरकतों का अब मुझपे ना असर हो,

धुंडु सदा मैं तुझको कर आंखे बंद मेरी,

आधार हो एक तेरा आस एक तेरी

इतना करीब करलो सिर्फ तुम्ही तुम्ही तुम हो,

तेरे नाम से सुरु हो तेरे नाम पे ख़तम हो,

ये सिलसिला न टूटे हो जाये जीत तेरी,

आधार हो एक तेरा आस एक तेरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।